Tuesday, 22 January 2019

Rajiv Dixit – ये एक चीज भारत के पास है जो यूरोप के पास नहीं


हमारा भारत देश दुनिया में एक बात के लिए मशहूर है कि यहाँ हर प्रकार की जलवायु पायी जाती है. दुनिया में आजतक कुल 16 जलवायु तय की गयी है या यूँ कहें कि खोजी गयीं हैं. जैसे गर्मी है सर्दी है बरसात है इस तरह के 16 मौसम हैं. और ये बहुत गर्व की बात है कि हमारे देश में ये सब तरह की जलवायु एक साथ उपलब्ध है.
आप अगर कल्पना करें कि हमको तो अफ्रीका की जलवायु देखनी है. तो ज्यादा दूर मत जाइए यहीं राजस्थान के जैसलमेर जिले में चले जाइये. अफ्रीका के सारे रेगिस्तान की जलवायु आपको जैसलमेर और उसके आसपास के क्षेत्र में देखने को मिल जाएगी. फिर आप कहेंगे कि हमको तो दक्षिण अमेरिका वाली ब्राजील, मक्सिको, चिली, कोलंबिया की जलवायु देखनी है. फिर भी बहुत दूर जाने की जरुरत नही पड़ेगी, दक्षिण भारत के कर्नाटक में कुछेक एरिया है जिसको पहाड़ी इलाका कहते है, कूडक के आसपास का वहां चले जाइये तो ब्राजील, चील, मक्सिको की जलवायु आपको वहां मिल जाएगी.
फिर अगर आपको लगे कि दुनिया के समुद्र से घिरे हुए देशों की जलवायु भारत में देखनी है तो बहुत दूर मत जाइये दक्षिण भारत के केरल में चले जाइये, केरल को देख लीजिये तो आपको समुद्र के आसपास की जलवायु देखने को मिल जाएगी. फिर अगर आप डेनमार्क और स्वीडन की जलवायु देखनी है जहाँ हमेशा बर्फ ही जमी रहती है तो ज्यादा दूर जाने की जरुरत नही है जम्मू कश्मीर या हिमाचल प्रदेश या उतरांचल चले जाइये, वहां आपको दिखाई दे जाएगी.
अगर आपको ऐसी जलवायु देखनी है जो एकदम सुखी है जहाँ की जलवायु में थोड़ी भी नमी न हो ऐसी जलवायु देखनी हो तो राजस्थान के चुरू में चले जाइये. तो आपको सुखी जलवायु दिखाई देगी जहाँ की जलवायु में बिलकुल भी नमी नही है. अगर कभी नमी आ भी जाए तो बड़ी बात मानी जाती है.
आपको अगर कीचड़ प्रधान जलवायु देखनी है जैसे ऑस्ट्रेलिया या न्यूजीलैंड देशों में बहुत कीचड़ है तो ऐसी कोई जलवायु आपको देखनी हो तो कहीं जाने जरुरत नही क्यूंकि भारत के हर शहर में कीचड़ है. क्योंकि यहाँ सफाई ही नही होती. आपको जो देखना है यहाँ सब है भारत में ही.
तो अब आप सोच रहे होंगे कि ये चक्कर क्या है कि दुनिया में जितने भी क्लाइमेट हैं वो सब के सब भारत में उपलब्ध है तो शायद यह भगवान् की कोई बड़ी कृपया हो. भारत के बड़े से बड़े देश अमेरिका, जर्मनी, फ़्रांस, स्विटज़रलैंड, डेनमार्क, नॉर्वे किसी भी देश में 2 से ज्यादा क्लाइमेट जोन नही है.
23 देश हैं युरोप के जो बहुत बहुत नजदीक हैं वहां तो 2 ही क्लाइमेट जोन हैं एक तो ठण्ड है और दूसरी बहुत अधिक ठण्ड की है. इसके अलावा कोई तीसरी चीज नही है. अफ्रीका में चले जाइये एक गर्मी है और एक भयंकर गर्मी है. अगर आप ब्राजील और मक्सिको में जाएँ तो एक बरसात है और एक भयंकर बरसात, कुछ देश तो ऐसे हैं जहाँ 8 महीने तक पानी बरसता ही रहता है. भारत में भी गोवा में चले जाइये 8 महीने पानी बरसता रहता है.
तो हर देश के बारे में जब क्लाइमेट जोन के बारे में बात होती है तो भारत के बारे में यह कहा जाता है कि यहाँ की जलवायु समशीतोषी है माने सब कुछ सम. यहाँ सब कुछ सम है. विषम और असम कुछ भी नही है सब कुछ सम है. गर्मी आयेगी तो बराबर आयेगी बरसात आयेगी तो बराबर आयेगी. सर्दी आयेगी तो बराबर आयेगी, बसंत ऋतू आयेगी तो बराबर आयेगी, यहाँ सब कुछ बराबर है. और क्यूंकि सब कुछ सम है तो इसलिए दुनिया के भूगोल शास्त्र के बीच में या मौसम विज्ञानं का अध्यन करने वालों के बीच भारत सबसे ऊँचा देश माना जाता है कि ये देश कुछ अद्भुत है.
ये जो हमारा देश अद्भुत है इसके पीछे एक कारण है, कैसे हुआ है के भगवान् या प्रकृति ने हमें ये सब तरह की जलवायु दी है और बराबर मात्रा में दी है इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि यहाँ सबसे पहले सूर्य निकलता है और सबसे अंत में सूर्य छिपता है. अर्थात इस देश को सूर्य का प्रकाश सबसे ज्यादा मिलता है. साल के 365 देशों में शायद ही 4-5 दिन ऐसे जाएंगे जिस दिन सूर्य न निकलता हो वर्ना हर दिन आपको सूर्य का प्रकाश मिलता है वो भी भरपूर मिलेगा.
दुसरे देशों की और चलें जैसे अमेरिका, यूरोप और उसके आसपास के देश तो बहुत गरीब है इस मामले में क्यूंकि उनको साल में मुश्किल से 15-20 दिन या अधिक से अधिक एक महिना ही सूर्य का प्रकाश मिलता है बाकी दिन तो सूर्य निकलता ही नही.
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जिन्दगी बदल देंगे आयुर्वेद के ये सूत्र


आप सभी से एक छोटी सी विनति है यदि आप स्वस्थ रहना चाहते हैं तंदरुस्त रहना चाहते हैं, तो अपने जीवन में अष्टांगहृदयं के सूत्रों का पालन करें. ये सूत्र इस प्रकार हैं.
पहला सूत्र – फ्रिज में रखा हुआ कुछ भी न खाएं और न ही पीयें. जो चीज फ्रिज में न राखी गयी हो और जिसको पवन का स्पर्श फुल हुआ हो, और जिसको सूर्य का प्रकाश भी खूब मिला हो उसको खाइए. मतलब हर चीज ताजी बनाकर खाइए. फ्रिज में रखी हुयी मत खाइए. फ्रिज में दूध, दही रखना भी बंद कर दीजिये, इनको बाहर रखिये तो आपके जीवन में स्वस्थ अपने आप आ जायेगा.
दूसरा नियम – आयुर्वेद या अष्टांगहृदयं का दूसरा नियम है, अगर जिंदगी स्वस्थ रखनी है तो ठंडा पानी मत पीजिये. पानी गर्म करके पीजिये. इतना गर्म होना चाहिए जितना आपका शरीर, क्यूंकि गर्म पानी शरीर की बहुत अच्छी तरह से सफाई कर देता है. टोक्सिंस वेस्ट को शरीर से बाहर करके फैंकता है. पचने में भी मदद करता है. गुनगुना पानी शरीर के पुरे तंत्र को व्यवस्थित रखता है. अगर आप जैन दर्शन मानते हैं तो ज्यादा देर रखा हुआ पानी भी मत पीजिये. क्यूंकि उसमें जिव वृदि होती है. तो हर समय ताजा यानि पानी को गुनगुना करके पीयें.
तीसरा नियम – आप जो भी खाना खाते हैं चबाचबाकर खाइए. हमारे भारत में चबाकर खाने का बहुत महत्त्व है यूरोप में नही है. यूरोप में ठण्ड होने के कारण जबड़े फ्लेक्सिबल नही होते तो ज्यादा चबा नही सकते. जो भी मिले उसे जल्दी जल्दी निगल कर खाते हैं यूरोप के लोग. हमारे यहाँ जबड़े बहुत फ्लेक्सिबल होते हैं तो हमें चबा चबाकर खाना चाहिए. और यूरोप में जो भी जबड़े है ना वो बहुत कड़क है, और कड़े मसूड़ों को साफ़ करना ब्रश से ही संभव है, इसलिए आप उनकी नक़ल मत करिए आपके मसूड़े बहुत सॉफ्ट हैं इसलिए नीम का दातुन करिए. अगर दातुन नही है तो घरेलू मंजन करिए.
चौथा नियम – भोजन को इतनी बार चबाकर खाइए जितने आपके दांत हैं, यानी 28 से 32 बार चबाइए. आयुर्वेद के अनुसार भोजन को इतना चबाइए कि लार के साथ ऐसे मिल जाए जैसे पानी की तरह उतर जाए. तो जिंदगी में कभी भी कोई बीमारी आने की सम्भावना नही है.
पांचवा नियम – पानी को जब भी पीयें घूंट घूंट कर पीजिये, जैसे गर्म दूध पीते हैं यानि सिप सिप करके पीजिये. ताकि पानी के साथ ज्यादा लार शरीर में जाए. लार जो है वो वात, पित्त और कफ तीनों को संतुलित रखता है. अगर मनुष्य को स्वस्थ रहना है तो हर रोज 4 से 5 लीटर लार की आवश्यकता होती है. और वो सिप सिप करके पानी पीने से ही संभव है. जिनको भी एड़ियों में दर्द है 3 दिन में ख़त्म हो जायेगा. कोई जॉइंट पैन है तो 12-13 दिनों में चला जायेगा. कितना भी भयंकर संधिवाद हो सिप करके पानी पीजिये, पानी को थोड़ी देर मुँह में घुमाइए फिर पीजिये. अगर आपका वजन बहुत बढ़ गया है, तो महीने 2 महीने ही कम हो जायेगा. जिस व्यक्ति का वजन 140 kg है 9 महीने लगातार सिप सिप करके पानी पीजिये वजन 70 kg रह जायेगा, वो भी बिना किसी योग, एक्सरसाइज के.
आपने देखा होगा कुत्ता कैसे पानी पीता है, सिप सिप करके, और कभी सुना है कुत्ते को डाईबिटिज हो गया है. चिड़िया सिप सिप करके पानी पीता है एक एक ड्राप उठाकर, इसीलिए चिड़िया को न संधिवाद होता है ना जॉइंट्स पैन होता है, न डाईबिटिज होता है न कैंसर होता है, न हाइपरटेंशन होता है न मिग्रैन होता है. वो स्वस्थ है मस्त है. बस वो खाने पीने का ध्यान रखती है हम रखते नही है इसलिए वो बीमार नही होती, हम बीमार होते है.
चिड़िया कभी रात को नही खाती और मनुष्य रात के 12 बजे भी खा लेता है. चिड़िया कभी भी खाने के साथ पानी नही पीती, सुबेरे खाना खाएगी दोपहर को पानी पीयेगी. सभी जानवर इस नियम का पालन करते हैं. सबसे मुर्ख भैंस वो भी इसी नियम का पालन करती है, सुबेरे भरपेट खाना खाएगी और दोपहर को 12 बजे पानी पीयेगी. लेकिन मनुष्य भैंस से भी ज्यादा गया गुजरा है, वो खाने के साथ गटा गट पानी पीता ही रहता है.
आयुर्वेद में ये सूत्र है “भोजन आंते विषम वारि” माने भोजन के पानी पीया तो विष पी लिया. तो आप भोजन के बाद पानी मत पीजिये, 1 से डेढ़ घंटे बाद पीयें. सुबह जब उठते है तो दिन की शुरुआत पानी से करनी चाहिए चाय से नही. जो लोग दिन की शुरुआत पानी से करते है और जो चाय से दोनों में जमीन आसमान का फर्क है. चाय से शुरुआत करने वालों को 1 नही 68 बिमारियां होती है. और जो पानी से दिन की शुरुआत करते हैं उनको कोई रोग नही होता.
कम से कम सुबह उठते ही एक गिलास पानी तो जरुर पीयें, 2 गिलास पीयेंगे तो और अच्छा है और 3 गिलास पीयेंगे तो और भी अच्छा है. पानी पीते ही दोनों आंत साफ हो जाती है.और जिसकी दोनों आंत साफ़ हो गयी तो चिंता मत कीजिये कि वो कभी बीमार पड़ेगा. राजीव जी कहते थे की वे कभी बीमार नही हुए और न ही कभी डॉक्टर के पास गये, एक आधी गोली भी नही खाई और एक इंजेक्शन भी नही लगवाया, लोग पूछते थे आपकी कौन सी दवाई खाते हैं तो वो कहते हैं कि वो कभी दवाई नही खाते बल्कि आयुर्वेद के नियमों का कट्टरता से पालन करते हैं.
वो कहते हैं अगर सुबेरे उठकर पानी नही मिला तो वो उतनी देर टॉयलेट नही जाते थे जब पानी मिलता था तभी टॉयलेट जाते थे. और उठते ही बिना मुँह धोये और दांत साफ किये पानी पीते थे. रात को ही दांत साफ करके सो जाते थे. पानी जब भी पीते थे सिप करके पीते थे. औत बर्फ डाला हुआ ठंडा पानी कभी नही पीते थे. खाने के कम से कम 1 से डेढ़ घंटे बाद पानी पीते थे. बस आपमें में और राजीव भाई में फर्क इतना ही है कि उन्होंने कभी यूरोप और अमेरिका की नक़ल नही की. वो ये कहते हैं कि अगर आप सोच विचार कर कोई चीज जीवन में कर रहे हैं तो कभी बीमार नही होंगे. बिना सोचे समझे यूरोप और अमेरिका की नक़ल न करें.
मानसिक बीमारियाँ अगर आपको है या जिंदगी भर आप उनसे बचना चाहते हैं तो आयुर्वेद का एक छोटा नियम पालन करते रहिये कि रात को जब सोयें तो पूर्व दिशा में सिर करके सोइए और अगर बहुत मजबूरी आ जाए तो दक्षिण दिशा में सिर रख कर सो जाइये. उत्तर और पश्चिम दिशा को हमेशा छोडिये. उत्तर और पश्चिम की दिशा सोने के लिए बल्कि पुजा करने के लिए है. जितने भी दिन आप पूर्व कि और सिर करके सोयेंगे उठने दिन आपको मानसिक बीमारी नही आयेंगी. और कम से कम नींद नही आने की जो बीमारियाँ है वो आपकी ख़त्म हो जाएँगी.
तो आज ही अपने बेड की दिशा पूर्व की और कर लें. अगर जमीन पे सोते है तो आसानी से पूर्व कि और सिर करके सो सकते हैं.
आप कभी भी खाना खाएं तो कभी भी यूरोप और अमेरिका की नक़ल मत कीजिये मतलब कुर्सी या मेज पे बैठकर भोजन न करें. आप कहीं शादी या पार्टी में जाते है तो आप अपना खाना थाली में लेकर कहीं भी आराम से नीचे बैठकर खा सकते हैं. इसमें कोई हम छोटे होने वाले नही है. आप मुर्ख नही कहलाओगे बल्कि जो खड़े होकर खा रहे हैं वो मुर्ख हैं. भारत में सबसे अच्छी खाने की पद्दति है सुख आसन में बैठ कर खाना और खाने के बाद कम से कम 10 मिनट तक बज्र आसन जरुर करें. और दोपहर के भोजन के बाद कम से कम 10 मिनट वज्रआसन जरुर करें. और 20 मिनट विश्राम जरुर करें. और रात के भोजन के बाद 10 मिनट तक वज्रआसन जरुर करें और फिर टहलने के लिए जरुर जाएँ. कम से कम 500-700 कदम चलें.
ये 10-12 सूत्र जो बताये हैं इनको अपना लीजिये ये ही आपको स्वस्थ बना देंगे और कुछ करने की जरुरत नही है. और आप सभी से विनति है कि अपने बच्चों को अभि से इन बातों का संस्कार दे दें. उनको आदत डाल दीजिये कि भोजन के साथ पानी नहीं पीना है. अगर कहें कि गले में खाना फंस गया है तो उनको कहो कि लस्सी पी लो, दूध पी लो लेकिन पानी मत पियो. दोपहर के भोजन के बाद लस्सी पिला दो. रात के भोजन के बाद दूध पिला दो और सुबह के भोजन के बाद जूस पिला दो लेकिन पानी न पिलाएं.
पानी एक घंटे बाद ही पिलाएं. पानी हमेशा सिप सिप करके पीयें. बच्चों को जो संस्कार मिल गये फिर वो भूलने वाले नही. और वो जीवन भर स्वस्थ रहेंगे.
अगर गलती से बीमार हो गये तो अलोपेथिक की दवा न लें क्यूंकि वो ठन्डे देशों के हिसाब से बनाई गयी दवाई है, इसलिए सभी दवाइयां गर्म हैं. और गरम देश में रहने वाले गर्म दवाइयां खाये तो भयंकर साइड इफेक्ट्स हैं. अगर चिकनगुनिया के रोगी अलोपेथिक की दवाई खाते हैं तो उनके कंधे, कमर में हमेशा दर्द रहेगा, पाँव सूजे रहेंगे, खाना निगल नही पाएंगे. और जो होमिओपेथिक की दवाई ले रहे हैं वो 2 दिन में ही ठीक होकर काम पे लग जायेंगे और कोई साइड इफ़ेक्ट नही होगा. अमेरिका के बहुत बड़े डॉक्टर चिल्ला चिल्ला कर कह रहे हैं कि अलोपेथिक में कोई दवा है ही नही. यह सिर्फ और सिर्फ जहर है खाकर मरना चाहो तो मरो.
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अपनी रसोई में ये 3 बदलाव कर ले, बीमारियाँ दूर रहेंगी


जो मनुष्य अपने वात, पित्त और कफ तीनो को संतुलित रख ले तो कभी बीमार नही पड़ेंगे. और अगर वात,पित्त और कफ असंतुलित हुआ तो बीमारियाँ ही बीमारियाँ आएंगी. तो हमें अपने शरीर में वात, पित्त और कफ को संतुलित रखना चाहिए.
इसके लिए सबसे अच्छा उपाय है कि आप नियमित व्यायाम करें इससे आपका वात, पित्त और कफ संतुलित रहेगा. हर दिन 1 घंटे का व्यायाम करें. इससे हमेशा आपका वात, पित्त और कफ ठीक रहेगा.
दूसरा उपाय ये है कि आप शुद्ध तेल खाएं. आप जो सरसों का तेल खाते हैं वो शुद्ध होना चाहिए. शुद्ध तेल का मतलब कोहलू से निकला हुआ तेल. बाजार का तेल कभी न खाएं. जो तेल हम बाजार से खरीदते हैं उसमें बहुत मिलावट है. बाजार के तेल में सबसे बड़ी मिलावट पामोलिन तेल की मिलावट है. और पामोलिन तेल मिला हुआ कोई भी तेल आप खाएंगे तो आपके शरीर में संकडों बीमारियाँ आएँगी. क्यूंकि पामोलिन किसी को हजम नही होता और वो सिर्फ कोलेस्ट्रोल बढाता है. और जो चीज कोलेस्ट्रोल बढ़ेगी वो सिर्फ बीमारी ही लाएगी. इसलिए बाजार का तेल बंद करके अपने घर में कोहलू का तेल लाना शुरू कर दें.
पहले गाँव गाँव में कोहलू चलते थे, अब फिर से चलाना शुरू कर दें या करवाएं. कोहलू का तेल खाने से आप हमेशा स्वस्थ रहेंगे. जब तक भारत के लोगों ने कोहलू का तेल खाया तब तक वो ज्यादा स्वस्थ रहे. और जब से हमने बाजार का तेल खाना शुरू किया बीमारियाँ घर में नही शरीर में घुसी.
ऐसे ही आयुर्वेद का एक और नियम है कि घी कभी भी डालडा न खाएं हमेशा देसी ही खाएं. क्यूंकि डालडा घी सैचुरेटेड फैट है जो कभी भी हजम नही होता. जितना भी डालडा आप खाते हैं वो सब फैट के रूप में जमा होता है. कोलेस्ट्रोल बढाता है और आपको तकलीफ देता है. डालडा की मिठाई न खाएं.
डालडा की पूरी और कचोडी न खाएं. डालडा से तैयार की हुई नमकीन न खाएं. जो कुछ भी खाएं सब देसी घी में तैयार की हुई चीजें ही खाएं. देसी घी कुछ भी महंगा नही है, एक तरह से देखा जाए तो ये डालडा से सस्ता है, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अगर आप देसी घी खायेंगे तो स्वस्थ रहेंगे और  डालडा खाएंगे तो बीमार होंगे और डॉक्टर आपसे वो सब निकाल लेगा जो आपने डालडा घी खरीद कर बचाया है. और इसीलिए डालडा सस्ता नही और महंगा पड़ता है. इससे अच्छा देसी घी खाएं.
अगर किसी की देसी घी खाने की हैसियत नही तो सुखी रोटी खाएं, लेकिन डालडा न खाएं दुनिया में डालडा कोई नही खाता भारत को छोड़ कर. भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश इन्ही देशों में डालडा है पूरी दुनिया में और कहीं डालडा नही है. अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन सभी जगह बंद है, हम ही मुर्ख है जो डालडा खा खा कर अपने शरीर का सत्यनाश कर रहे है. तो डालडा मत खाइए.
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