Chhath Puja Festival in Hindi
छठ पूजा विधि, विशेष जानकारी हिन्दी में
छठ पूजा (Chhath Puja) हिन्दू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष में मनाया जाने वाला हिन्दुओ का एक विशेष त्यौहार है जो की अधिकतर पूर्वी भारत के लोगो का एक प्रमुख पर्व है अक्सर कहा जाता है की लोग चढ़ते हुए सूर्य को सलाम करते है लेकिन छठ पूजा (Chhath Puja) के त्योहार की ऐसी महिमा है की जिसमे उगते हुए और डूबते हुए सूर्य की आराधना की जाती है जो की अपने आप में एक अनोखा पर्व है जो की मानव को प्रकृति से सीधे रूप से जोडती है छठ पूजा में सूर्य देव की आराधना किया जाता है जिसमे सम्पूर्ण परिवार के मंगल की कामना की जाती है और लोगो का मानना है की सूर्य देव की पूजा करने से सूर्य के तेज से मानव रोग एंव कष्ट मुक्त होता है
छठ पूजा कब कब मनाया जाता है ?
Chhath Puja Kab Manaya Jata Hai
छठ पूजा साल में दो बार मनाया जाता है
1 – चैत्र की छठ पूजा
2 – कार्तिक की छठ पूजा
जिसमे कार्तिक महीने की छठ पूजा का विशेष महत्व है यह छठ पूजा कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष में षष्ठी को मनाया जाता है जो की मुख्यत 4 दिनों का त्योहार है छठ पूजा को डाला छठ, छठी माई के पूजा, डाला पूजा और सूर्य षष्ठी पूजा के नाम से भी जाना जाता है
छठ पूजा क्यों मनाया जाता है ?
Chhath Puja Kyo Manaya Jata Hai
छठ पूजा व्रत
Chhath Puja Vrat in Hindi
छठ पूजा लगातार 4 दिनों चलने वाला महापर्व है जिसमे महिलाये, पुरुष, बच्चे सभी सम्मिलित रूप से भाग लेते है छठ पूजा व्रत मुख्यत महिलायों द्वारा किया जाता है जो की अपने आप में एक कठिन व्रत है महिलाओ के अलावा पुरुष भी इस व्रत का पालन करते है इस व्रत में महिलाए लगातार 4 दिन का व्रत रखती है जिसके दौरान इन दिनों में ये महिलाये जमीन के फर्श पर ही चटाई या चादर के सहारे सोती है चूकी यह पर्व साफ़ सफाई का पर्व है जिसमे साफ़ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है व्रत के दौरान नये वस्त्र धारण किये जाते है जो की सिली हुई नही होती है इस तरह महिलाये इन दिनों साड़ी या धोती के वस्त्र ही धारण करती है
छठ पूजा व्रत महिलाओ द्वारा पुत्र रत्न प्राप्ति की कामना से की जाती है जबकि कुछ लोग अपने मनोवांछित फल की प्राप्ति हेतु इस व्रत का पूरी निष्ठा के साथ पालन करते है
छठ पूजा का इतिहास
Chhath Puja History in Hindi
भारतीय संस्कृति में ऋग वैदिक काल से सूर्य की उपासना का उल्लेख मिलता है हिन्दू धर्म के अनुसार सूर्य एक ऐसे देवता है जिनका साक्षात् रूप से दर्शन किया जाता है सम्पूर्ण जगत सूर्य के प्रकाश से ही चलायमान है पेड़ पौधों के जीवन के अस्तित्व से लेकर दिन, रात, धुप, छाव, सर्दी, गर्मी, बरसात सभी सूर्य द्वारा ही संचालित होता है जिस कारण सूर्य को आदिदेव भी कहा जाता है जिस कारण से हिन्दू धर्म में सूर्य देव की विशेष पूजा अर्चना उपासना का महत्व है
छठ पूजा को लोक आस्था का पर्व भी कहा जाता है यह दीपावली के बाद ठीक छठवे दिन पड़ता है छठ पूजा कर अनेक लोक कथाये एंव कहानिया प्रचलित है जो इस प्रकार है
छठ पूजा की पौराणिक कहानिया एंव रोचक तथ्य
Chhath Puja Ki Kahani in Hindi
छठ पूजा मनाने के पीछे कई पौराणिक एंव लोक कथाये है जो इस प्रकार है
1 – रामायण काल में जब श्रीराम लंका विजय होकर वापस अयोध्या लौटे थे तब अपने राज्य में रामराज्य की स्थापना हेतु इस दिन भगवान राम ने अपनी पत्नी सीता के साथ व्रत किया था और सूर्यदेव की विधिवत पूजा अर्चना किया था और फिर अगले अगले दिन सूर्योदय के समय सूर्य की पूजा करके इस व्रत का पालन करके सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया था जिसके चलते लोकमंगल कल्याण हेतु इस व्रत का आयोजन लोगो द्वारा होने लगा
2 – महाभारत काल के अनुसार जब कुंती अविवाहित थी तब एक सूर्य देव का अनुष्ठान किया था जिसके फलस्वरूप उन्हें पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई थी जिन्हें कर्ण के नाम से जाना जाता है लेकिन लोकलाज के भय से कुंती ने इस पुत्र को गंगा में बहा दिया था सूर्य के वरदान से उत्पन्न कर्ण भी सूर्य के समान तेज और अत्यधिक बलशाली भी थे जिसके चलते आगे चलकर लोग ऐसे सूर्य के समान पुत्र की कामना हेतु सूर्य उपासना और पूजा करने लगे
एक अन्य मान्यता के अनुसार सूर्य से जन्मे कर्ण सुबह शाम सूर्य की घंटो जल में रहकर पूजा उपासना किया करते थे जिसके कारण उनके जीवन पर सूर्यदेव की हमेसा से विशेष कृपा रही जिस कारण लोग सूर्य से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इस छठ पूजा का आयोजन करने लगे
अन्य कथाओ के अनुसार जब पांडव जुए में सबकुछ हारकर जंगल में निवास करने लगे तब अपने राज्य और सुख की प्राप्ति के लिए भी द्रौपदी ने माता कुंती के साथ सूर्य पूजा करती थी जिसका मुख्य उद्देश्य अपने परिवार की लम्बी आयु और स्वास्थ की कामना थी
छठ पूजा की कथा
Chhath Puja Katha in Hindi
धार्मिक मान्यताओ के अनुसार प्राचीन काल में प्रियवद नाम के एक राजा थे जिनकी कोई भी सन्तान नही थी तब महर्षि कश्यप के आदेशानुसार राजन ने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ किया था यज्ञ आहुति से तैयार खीर को उनकी पत्नी मालिनी को दिया गया जिसके कारण इस खीर खाने के बाद राजन को पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई लेकिन जो पुत्र पैदा हुआ था वह मृत था जिसके कारण वह राजा बहुत दुखी हुए और अपने पुत्र की अंतिम संस्कार के लिए शमशान ले गये जहा राजा ने अपने पुत्र के चिता पर भष्म होकर अपना जान देना चाहा तभी वहा ईश्वर की पुत्री देवसेना प्रकट हुई और कहा की “हे राजन मै इस प्रकृति की मूल प्रवृत्ति के छठवे अंश से उत्प्प्न हुई हु जिस कारण मै षष्ठी कहलाती हु अतः आप लोग यदि पुत्र की कामना करते है तो अप मेरी पूजा करे तभी आपको फिर से पुत्ररत्न की प्राप्ति होंगी जिसके बाद राजन से षष्ठी देवी की विधिवत पूजा अर्चना किया जिसके बाद राजन को फिर से पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई चूकी यह पूजा कार्तिक महीने के षष्ठी के दिन हुआ था जिसके चलते आगे चलकर छठ पूजा होने लगा
छठ पूजा विधि
Chhath Puja Vrat Vidhi in Hindi
छठ पूजा का त्योहार 4 दिनों तक मनाया जाता है जिसके हर दिन का अपना महत्व है जो इस प्रकार है
1 :– नहाय खाय –
छठ पूजा के पहले दिन यानी कार्तिक महींने के शुक्ल पक्ष के चतुर्थी को नहाय खाय के नाम से भी जाना जाता है इस दिन पूरे घर को साफ़ सुथरा करके शुद्ध करके पूजा के योग्य बनाया जाता है इस दिन जो लोग व्रत रखते है वे सबसे पहले स्नान करके नये वस्त्र धारण करके इस व्रत की शुरुआत करते है व्रत करने वाले के शाकाहारी भोजन खाने के बाद ही घर के अन्य सभी सदस्य भोजन ग्रहण करते है शाकाहारी भोजन में कद्दू और चने की दाल तथा चावल विशेष रूप से महत्व है
2 :- लोहंडा और खरना –
इस व्रत के दुसरे दिन यानी पंचमी के दिन पूरे दिन व्रत रखने के पश्चात शाम को व्रती भोजन ग्रहण करती है जिसे खरना कहा जाता है खरना का मतलब होता है पूरे दिन पानी की एक बूंद भी पिए बिना व्रत रहना होता है फिर शाम को चावल और गुड़ से खीर बनाया जाता है जिसमे चावल का पिठ्ठा और घी की चुपड़ी रोटी भी बनायीं जाती है इस खाने में नमक और चीनी का प्रयोग नही किया जाता है और इसे प्रसाद के रूप से आस पास के लोगो को भी बाटा जाता है
3 :- संध्या अर्घ्य –
4 :- उषा अर्घ्य –
छठ पूजा के चौथे दिन यानी सप्तमी के दिन जैसे लोग डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देते है ठीक उसी प्रकार पूरे परिवार के साथ उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दी जाती है और विधिवत पूजा पाठ करने के बाद प्रसाद का वितरण किया जाता है और इस प्रकार इस छठ पूजा का समापन किया जाता है
छठ पूजा के नियम
Chhath Puja ke Niyam
चुकी छठ पूजा का पर्व बहुत ही साफ़ सफाई का पर्व है यह बहुत ही कठिन और परीक्षा का व्रत होता है इसलिए 4 दिनों के दौरान घरो में लहसुन प्याज तक नही खाए जाते है और जो लोग व्रत रखते है उन्हें घर में एक ऐसा कमरा दिया जाता है जहा पर पूरी तरह से शांति रहे जिससे व्रत रखने वाला ईश्वर में ध्यान लगा सके और जो लोग छठ पूजा का व्रत रखते है उनके मन में किसी भी प्रकार का लालच, मोह भय आदि नही रखनी चाहिए
छठ पूजा का महत्व
Chhath Puja Ka Mahatva in Hindi
छठ पूजा का अपने आप में एक विशेष महत्व है पहले यह त्योहार भारत के पूर्वी भागो यानि उत्तर प्रदेश और बिहार तक ही सिमित था लेकिन जैसे जैसे सूचना के क्षेत्र में क्रांति आई है इस पर्व का प्रसार पूरे भारत, नेपाल जैसे दूर देशो तक फैलता जा रहा है इस पर्व की ऐसी मान्यता भी की जो लोग भी इस छठ पूजा के व्रत का विधिवत पालन करते है उन्हें कभी भी संतान सुख से अछूते नही रहते है और उनका शरीर स्वस्थ्य और निरोगी होता है
कहा जाता है की इस व्रत को निरंतर करने से हमारे जीवन में सुख शांति की प्राप्ति होती है और हमारे जीवन की आयु भी स्वस्थ्य और लम्बी होती है जिस कारण से इस छठ महापर्व का महत्व बहुत तेजी से लोगो में बढ़ता जा रहा है
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